उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों का नया दौर, पुराने चेहरों की नई भूमिका की मांग

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों का नया दौर, पुराने चेहरों की नई भूमिका की मांग

A new phase of political activity in Uttar Pradesh

A new phase of political activity in Uttar Pradesh,

लखनऊ। A new phase of political activity in Uttar Pradesh, प्रदेश का राजनीतिक पारा सूरज के साथ लगातार चढ़ रहा है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां भाजपा पर नए-नए तीर छोड़ रहे हैं, वहीं भगवा खेमा कई बदलावों का धरातल बनाने में उलझा है।

पार्टी अब नई जिला, क्षेत्रीय एवं प्रदेश इकाई बनाने के साथ ही मंत्रिमंडल में बदलावों की गुणागणित में उलझी है, वहीं निगम, बोर्ड, आयोग समेत कई समितियों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के समायोजन की कसरत चल रही है।

गुजरात की तर्ज पर यूपी में प्रदेश एवं क्षेत्रीय इकाई में बड़े स्तर पर बदलाव तय हैं, लेकिन पार्टी इस बात पर मंथन कर रही है कि नए चेहरों पर दांव लगाने का ज्यादा लाभ होगा या फिर अनुभवी चेहरों पर चुनाव तक भरोसा रखना बेहतर होगा।

वहीं, प्रदेश के पुराने पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों को कहां समायोजित किया जाएगा, इसका भी कोई फार्मूला साफ नहीं है। पिछले साल दिसंबर के अंत में गुजरात की प्रदेश इकाई में चार चेहरों को छोड़कर पूरी टीम बदल दी गई।

उत्तर प्रदेश की प्रदेश इकाई में कई पदाधिकारी दस साल से ज्यादा समय से पदों पर बने हैं। हालांकि, उसमें से कई एमएलसी और विधायक होने के बावजूद अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों को भी संभाल रहे हैं, लेकिन अब नई पीढ़ी को राजनीतिक रूप से आगे लाने की बात तेज हुई है।

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प्रदेश पदाधिकारियों में से कई का प्रदर्शन मानक के अनुरूप नहीं रहा है ऐसे में उनका जाना तय माना जा रहा। प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रदेश इकाई में बड़े पैमाने पर बदलाव का संकेत दिया है।

पुराने चेहरों ने की नई भूमिका देने की मांग

क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने की चर्चा के बीच यह बात भी उठने लगी है कि क्या उन्हें प्रदेश इकाई में समायोजित किया जाएगा या फिर प्रदेश के मोर्चों के प्रभारी बनाने का फार्मूला अपनाया जाएगा। माना जा रहा है कि पुराने कई चेहरों ने पार्टी के सामने अपने लिए नई भूमिका देने की मांग रखी है।

पूर्व में क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे कई चेहरों को एमएलसी बनाया गया, लेकिन इस बात उन्हें ज्यादा चिंता सता रही है। प्रदेश इकाई में क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर विशेष जोर होगा। सात महामंत्रियों में पश्चिम क्षेत्र से कोई चेहरा नहीं है, जबकि अवध क्षेत्र के तीन नाम हैं।

17 उपाध्यक्षों में से छह चेहरे पश्चिम क्षेत्र से हैं। तीन उपाध्यक्ष अकेले कानपुर से हैं। लखनऊ से तीन, जबकि आगरा, बुलंदशहर एवं वाराणसी से दो-दो प्रदेश मंत्री बनाए गए।

नई टीम में क्षेत्रीय गणित नए सिरे से बिठाया जाएगा, लेकिन इस बात पर ज्यादा नजरें हैं कि पार्टी पुराने चेहरों को बदलकर नए विजन वाले कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी बनाएगी, या अनुभव एवं पैरोकारी देखते हुए कई पुराने चेहरे एक बार फिर संगठन की पिच पर बैटिंग करने उतार दिए जाएंगे।